अनेक रोगों का हल आयुर्वेदिक मालिश

 

आजकल की व्यस्त जिंदगी में हर इन्सान इतना व्यस्त हो गया है क उसके पास अपने शारीर की देखभाल करने का भी समय नहीं होता अपने स्वास्थका ध्यान  रखने के लिए हमे मालिश जरुर करवानी चाहिए . मसाज देती आपको शारीरिक को आराम  और मानसिक आनंद .मसाज वेसे ही नाम सुनते ही कमाल का अनुभव आप सोचते हें असल में मसाज न केवल मानसिक शांति देती है बल्कि रक्त परिसंचरण भी ठीक करती है . जीवन को सही मायने में जीने के लिए कुछ जरुरी चीजे होती है जेसे की संतुष्टि , आनंद और स्वास्थ और अगर आपके पास तीनो चीजे होती है तो उसे हम एक सुखी आदमी कह सकते हैं .मसाज आपके लिए दिमागी एवं शारीरिक तोर पर दोनों क लिए अच्शी होती है . एसा मेडिकल जगत के वैज्ञानिक भी मानते है  मसाज करने से हम लम्बे समें तक तंदरुस्त बने रह सकते हैं . मसाज से शारीर में खून का सञ्चालन बढता है यह अधिक हुए वात को ठीक करती है . मसाज  से मस्पेशिओं को ताकत मिलती है , शारीर मैं लचक बनी रहती है , जोड़ो के दर्द भी ठीक हो जाते हैं .मसाज प्राचीन समय से चलती आ  रही है . मसाज से वात और कफ जो की हमारे शारीर के दोष हैं इन्हें संतुलित रहते हैं .मसाज से शारीर की सुन्दरता बढती है साथ में बहुत से रोग जेसे दमा , गठिया , अपच और मस्पेशिओं तथा हड्डियो के रोगों मैं भी लाभकारी है . मालिश से शारीर में खून की रफ़्तार तेज होती है जिससे शारीर मैं ओक्षिजन की मातरा सही रहती हे . मालिश करवाने से शारीर के गंदे पदार्र्थ ल्य्म्फटिक सिस्टम से शारीर से बाहर निकल जाते हैं , मस्पेशिओं मैं चुस्ती फुर्ती रहती है . मासिक धरम की अनेक परेशानिया मालिश कराने से दूर होती है . मालिश से चेहरे की झुरिआं दूर ही जाती हें और त्वचा भी चिकनी और मुलायम रहती है . पेट की मालिश करने से भोजन पचने की क्रिया ठीक हो जाती है . दिमागी परेशानी और शारीर की थकान मालिश करने से दूर हो जाती है .

आयुर्वेदिक मालिश तकनीक विश्राम प्रदान करता है, परिसंचरण तथा जीवविषों का निष्कासन करता हैI यदि दैनिक अभ्यास के रूप में अपनाया जाये, तो आयुर्वेदिक मालिश तकनीक शरीर का कायाकल्प करने में भी मदद करता है। प्राचीन कालों में आयुर्वेदिक चिकित्सालाएँ आम तौर पर मालिश नहीं प्रदान करती थीं, क्योंकि सभी इसे देते एवं प्राप्त करते थे ।  केवल जब मरीजों को एक विशेष उपचार की जरूरत होती थी तो उन्हें विशेषज्ञों के पास भेजा जाता था जो उचित आयुर्वेदिक तकनीकों का प्रयोग करते थे ।

एलोपैथिक औषधि में संधिसोथ, स्पॉन्डिलाइटिस, कटिशूल, स्लिप्ड डिस्क, कंधा का अकड़ना, तनाव एवं मोच, तंत्रों का दर्द (साइटिका) आदिIआयुर्वेद में इस प्रकार की समस्याओं के उपचार के लिये अनेक फल-सिद्ध प्रक्रियाएँ अर्थात पिझिचिल, नजावराकिझी, अभयांगम, शिरोधारा,शिरोवस्ती, इलाकिझी, उबटन आदि उपलब्ध हैं ।

पिझिचिल

एक आरामदेह, शमक एवं पुन: यौवन प्रदान करने वाला उपचार है जिसमें औषधियुक्त नर्म तेल संपूर्ण शरीर (सिर एवं गर्दन को छोड़कर) पर एक निश्चित समय के लिये निरंतर धार के रूप में उड़ेला जाता है ।  इसका प्रयोग संधिसोथ, उम्र वृद्धि, सामान्य कमजोरी, पक्षाघात का प्रभावपूर्ण ढ़ंग से उपचार करने के लिये किया जाता है ।  ’पिझिचिल’ एवं ’सर्वांगधारा’ तकनीकी रूप से समान हैंI ’पिझिचिल’ का अक्षरश: अर्थ ’निचोड़ना’ हैI यहाँ,नर्म तेल को मरीज के शरीर के ऊपर तेल के पात्र में समय-समय पर  डुबाये हुये कपड़े के द्वारा निचोड़ा जाता है । पिझिचिल के प्रयोग की सलाह वात शरीरी द्रव-पक्षाघात (आंशिक पक्षाघात) के निरस्तीकरण, लकवा एवं मांशपेशियों में तनाव के द्वारा उत्पन्न बीमारियों  – तथा मांशपेशियों को प्रभावित करने वाली अन्य अपकर्षक बीमरियों के लिये दी जाती है ।

शिरोधारा

एक अनोखा उपचार है जहाँ एक निश्चित अवधि के लिये सिर को विशिष्ट औषधियुक्त तेलों के नियमित धार में स्नान कराया जाता है । यह मानसिक आराम के लिये एक प्रभावकारी चिकित्सा है एव यह अनिद्रा, तनाव, विषाद, घटती हुई मानसिक चुस्ती आदि को ठीक करता है । जब औषधियुक्त छाछ तेल का स्थान लेता है, इस चिकित्सा को तक्रधारा कहा जाता है ।

अभयांगम

पुनर्यौवन के लिये सामान्य चिकित्सा है । जड़ी-बूटीयुक्त तेल के साथ इस संपूर्ण शरीर मालिश का प्रयोग शरीर के 107 आवश्यक बिन्दुओं(मर्मों) के विशेष संबंध में मालिश के लिये किया जाता है । यह बेहतर संचार, मांशपेशीय स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं बेहतर स्वास्थ्य अनुरक्षण में मदद करता है । यह आपकी त्वचा को मजबूत बनाता है एवं आदर्श स्वास्थ्य तथा दीर्घायुपन को प्राप्त करने के लिये सभी ऊतकों को पुनर्यौवन प्रदान करता है तथा मजबूती देता हैI यह ओजस (प्राथमिक जीवनशक्ति) को बढ़ाता है एवं इस प्रकार आपके शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है । आपकी आँख के लिये लाभकारी होने के अतिरिक्त, अभयांगम आपको गहरी निद्रा प्रदान करता है । यह भी वात रोग का एक उपचार है ।

इलाकिझी

त्वचा में नये प्राण भरने की चिकित्सा है । जड़ी-बूटी संबंधी संबंधी पुलटिस विभिन्न जड़ी-बूटियों एवं औषधियुक्त चूर्ण से बनती है । औषधियुक्त तेलों में गर्म होने के बाद आपके सम्पूर्ण शरीर की मालिश इन पुलटिसों से की जाती है । यह परिसंचरण को बढ़ावा देता है एवं पसीने को बढ़ाता है जो बदले में वर्ज्य पदार्थ को बाहर निकालने में त्वचा की मदद करता है, उसके द्वारा त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार लाता है । इसका प्रयोग जोड़ों के दर्द,मांशपेशी के ऐठनों, तनाव एवं गठिया को रोकने के लिये भी होता है।

उबटन

उबटन एक सौन्दर्य मालिश है । इसका प्रयोग वृद्ध लोगों की मदद करने के लिये होता है एवं युवा माताओं के साथ-साथ शिशुओं के लिये विशेष तकनीकों का विकास किया गया है ।
भारतीय पारंपरिक मालिश तकनीक आयुर्वेदिक दोषों एवं मर्मों (प्रतिवर्ती उपचार के समान दवाब बिन्दुओं) पर आधारित है । विशेष चिकित्सात्मक उपचारों जैसे कि पंचकर्म शुद्धिकरण में विशिष्ट आयुर्वेदिक मालिश चिकित्सा का प्रयोग किया जाता है ।

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